बिलासपुर |
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। सर्व सवर्ण समाज, बिलासपुर ने इन नियमों को “सामान्य वर्ग विरोधी और काला कानून” बताते हुए 1 फरवरी रविवार को भारत बंद के तहत बिलासपुर बंद का ऐलान किया है।
सवर्ण समाज का साफ कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन नियमों को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।

“सामान्य वर्ग के भविष्य से खिलवाड़” का आरोप
सवर्ण समाज के नेताओं का आरोप है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर करने की साजिश हैं। उनका कहना है कि ये नियम योग्यता के बजाय भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और लाखों छात्रों का भविष्य अंधकार में धकेल रहे हैं।
समाज ने चेतावनी दी है कि यह लड़ाई सिर्फ बिलासपुर या छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देशव्यापी आंदोलन का रूप लेगी।
सुबह 9 बजे नेहरू चौक से बंद का आह्वान
1 फरवरी रविवार को सुबह 9 बजे नेहरू चौक से सर्व समाज के लोग शहर में बंद कराने निकलेंगे। व्यापारिक प्रतिष्ठानों, बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों को पूरी तरह बंद रखने की अपील की गई है। आंदोलनकारियों का दावा है कि बिलासपुर में बंद का व्यापक असर देखने को मिलेगा।

व्यापारी संगठनों का खुला समर्थन
इस भारत बंद को शहर के लगभग सभी प्रमुख व्यापारी संगठनों का समर्थन प्राप्त है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स, व्यापार विहार, बुधवारी बाजार, गोल बाजार, तेलीपारा, शनिचरी बाजार, सर्राफा संघ, मेडिकल कॉम्प्लेक्स, मुंगेली नाका, मंगला चौक, सरकंडा, जूना बिलासपुर सहित दर्जनों व्यापारी संघों ने बंद में सहयोग देने की घोषणा की है।

सर्व समाज एकजुट, आर-पार की लड़ाई का ऐलान
ब्राह्मण समाज, अग्रवाल समाज, सिंधी समाज, कायस्थ समाज, पंजाबी समाज, खंडेलवाल समाज, गुजराती समाज, मारवाड़ी ब्राह्मण समाज, केशरवानी समाज, जैन समाज, राजपूत क्षत्रिय समाज, बंगाली समाज, तेलुगु ब्राह्मण समाज, महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण समाज और पाटलिपुत्र समाज सहित समस्त सवर्ण समाज ने एक स्वर में यूजीसी के नियमों का विरोध करते हुए आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है।
2 फरवरी को कलेक्ट्रेट घेराव और ज्ञापन रैली
आंदोलन के अगले चरण में 2 फरवरी सोमवार को दोपहर 12 बजे, देवकीनंदन चौक से कलेक्ट्रेट परिसर तक विशाल रैली निकाली जाएगी। रैली के माध्यम से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। आयोजकों ने इसे निर्णायक संघर्ष बताया है।
चेतावनी: नियम वापस नहीं हुए तो आंदोलन होगा और उग्र
सर्व सवर्ण समाज ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि सरकार ने यूजीसी के नए नियमों को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

