“वेतन विसंगति और वादाखिलाफी को लेकर सड़कों पर उतरे शिक्षक, सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी”


बिलासपुर
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक एवं समग्र शिक्षक फेडरेशन के आह्वान पर शनिवार को बिलासपुर में हजारों शिक्षकों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। लंबित मांगों को लेकर शिक्षक कानन गार्डन में एकत्र हुए और एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। वादाखिलाफी से नाराज़ शिक्षकों ने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि भाजपा सरकार ने चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ के तहत सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने का वादा किया था, लेकिन सरकार बने दो वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शिक्षकों ने इसे उनका संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।


धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने निजी मोबाइल से ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपने निजी मोबाइल से उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बाध्य करना निजता का खुला उल्लंघन है। संगठन की मांग है कि शासन ऑनलाइन हाजिरी के लिए अलग से डिवाइस उपलब्ध कराए, ताकि शिक्षकों की निजी जानकारी सुरक्षित रह सके।

सभा में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर भी नाराजगी जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को बार-बार परीक्षा के नाम पर प्रताड़ित करना अनुचित है और इस अनिवार्यता को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कर क्रमोन्नत वेतनमान लागू करने, पूर्व सेवा की गणना करते हुए समस्त लाभ प्रदान करने की मांग प्रमुखता से रखी गई।

सभा को प्रदेश प्रवक्ता चंद्रप्रकाश तिवारी, जिलाध्यक्ष सुनील पांडेय और संयुक्त सचिव तामेश्वर सन्नाड्य सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने शिक्षकों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की वादाखिलाफी से शिक्षक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें अनसुनी रहीं, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन और प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है।

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